सिरमौर में भारी बारिश नहीं उखाड़ पाई प्राकृतिक फसल की जड़ें, खादों से तैयार फसल बुरी तरह तबाह
हिमाचल प्रदेश के जिला सिरमौर के उपमंडल पांवटा साहिब में बुधवार और वीरवार की रात को हुई भारी बारिश से क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों में फसलों पर कहर बनकर टूटी । वहीं, दूसरी तरफ एक ऐसी भी तस्वीर सामने आई है, जहां यह बारिश प्राकृतिक रूप से उगाई फसलों की जड़ें तक नहीं हिला पाई. लिहाजा प्राकृतिक और रासायनिक उर्वरकों से की गई खेती के बीच अंतर भी देखने को मिला.
बीते काफी समय से केंद्र और प्रदेश सरकारें प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार काम कर रही है. इसको लेकर किसानों को निरंतर जागरूक भी किया जा रहा है. इसी बीच उपमंडल पांवटा साहिब में भीषण बारिश के बीच प्राकृतिक तरीके से उगी फसलों और दूसरी खेती में अंतर समझाने के लिए इससे बड़ा उदाहरण नहीं मिल सकता.
बता दें बीते दिनों हुई भारी बारिशके कारण पांवटा साहिब के ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश से भारी नुकसान हुआ है. किसानों की खेतों में लगी धान के साथ-साथ गन्ने की फसल भी खेतों में तबाह हो गई. फिलहाल कृषि विभाग फसलों को हुए नुकसान की रिपोर्ट तैयार करने में जुटा है. वहीं कृषि विभाग की मानें तो क्षेत्र की 11 पंचायतों में धान (500) हेक्टेयर, मक्का (100 हेक्टेयर), गन्ना (150 हेक्टेयर) और चरी (90 हेक्टेयर) को बारिश से नुकसान हुआ है. बताया जा रहा है कि फसलों को सबसे अधिक नुकसान कुंडियों पंचायत में दर्ज किया गया है.
प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें किसानः डॉ. राज कुमार
कृषि उपनिदेशक सिरमौर डॉ. राज कुमार ने कहा, बीते बुधवार रात बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है. बहराल, पातलियों, बद्रीपुर, अम्बोया तारूवाला, भंगाणी, जामनीवाला, भांटावाली, भुंगरनी और मतरालियों पंचायतों में मक्की, धान, गन्ना सहित चारे को भी नुकसान पहुंचा है. कृषि विभाग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दे रहा है, जिसको लेकर हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं. उन्होंने किसानों से भी आग्रह किया कि प्राकृतिक खेती को प्रमुखता दें. इस खेती में शून्य लागत है और उत्पादन भी रासायनिक उर्वरकों से उपजी फसलों से काफी अधिक है. लिहाजा अब मांग भी प्राकृतिक खेती से उगी फसलों की सबसे अधिक है।
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