Echo

युग हत्याकांड: दो दोषियों की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली, एक बरी




हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बहुचर्चित युग हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दो दोषियों की फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया, जबकि तीसरे आरोपी को बरी कर दिया गया। निचली अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा की पुष्टि और दोषियों की अपील पर मंगलवार को यह फैसला सुनाया गया। यह मामला सत्र न्यायाधीश शिमला द्वारा रेफरेंस के तौर पर हाईकोर्ट को भेजा गया था।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की विशेष खंडपीठ ने पिछली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को इस मामले में फैसला आया।  कोर्ट ने चंद्र शर्मा और विक्रांत बख्शी उम्रकैद की सजा सुनाई है, जबकि तेजिंदर पाल को बरी कर दिया है। कोर्ट के विस्तृत फैसले का इंतजार है। युग के परिजनों ने इस फैसले से संतुष्ट नहीं है। युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि  हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।


 2018 में सुनाई गई थी फांसी की सजा
सत्र न्यायालय शिमला ने 6 सितंबर, 2018 को तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी। अदालत ने इस जघन्य अपराध को दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी का करार दिया था। इसके बाद तीनों आरोपियों ने दोष सिद्धि के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील दायर की। अपीलकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता ने दोषियों की उम्र, व्यवहार और पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए मृत्यु दंड न देने की गुहार लगाई थी।


फिरौती के लिए हुआ था मासूम का अपहरण
14 जून, 2014 को शिमला के राम बाजार से चार साल के मासूम युग का अपहरण किया गया था। आरोपियों ने फिरौती के लिए यह कदम उठाया था। प्रारंभिक जांच शिमला पुलिस ने की, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद मामला सीआईडी को सौंपा गया। अगस्त 2016 में सीआईडी ने भराड़ी स्थित पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया। आरोपियों ने मासूम के शरीर से पत्थर बांधकर उसे टैंक में फेंक दिया था।
सीआईडी ने विस्तृत जांच के बाद 25 अक्टूबर, 2016 को अदालत में चार्जशीट दायर की। इस मामले में कुल 105 गवाहों के बयान दर्ज हुए। साढ़े दस माह चली सुनवाई के बाद अदालत ने दोषियों को फांसी की सजा सुनाई थी।

 
 



Share:
Share:
Comment
Leave A Comment