हिमाचल में समग्र शिक्षा के तहत चौथी कक्षा के बच्चों की होगी फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी
हिमाचल प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत चौथी कक्षा के बच्चों के बुनियादी सीखने के स्तर का वैज्ञानिक आकलन किया जा रहा है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की ओर से प्रदेश में फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी 24 और 25 अप्रैल को आयोजित की जाएगी। यह अध्ययन समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रदेश के 205 चयनित सरकारी और निजी स्कूलों में सैंपल आधार पर संचालित होगा। इस प्रक्रिया के तहत कुल 2460 बच्चों के फाउंडेशनल लर्निंग स्तर का आकलन किया जाएगा, जिससे प्रारंभिक कक्षाओं में बच्चों की वास्तविक सीखने की स्थिति का एक स्पष्ट और तथ्यात्मक चित्र सामने आएगा।
फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी उन बच्चों पर केंद्रित होगी जिन्होंने कक्षा तीन उत्तीर्ण कर ली है और वर्तमान में चौथी कक्षा में अध्ययनरत हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य यह समझना है कि इन बच्चों ने अब तक पढ़ने, लिखने और गणित जैसे बुनियादी कौशलों में कितनी दक्षता हासिल की है। यह आकलन बच्चों की समझ और वास्तविक सीखने के स्तर को मापने का प्रयास करेगा, जिससे यह पता चल सके कि बुनियादी शिक्षा की प्रक्रिया कितनी प्रभावी रही है।
हिमाचल प्रदेश में राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, (एससीईआरटी ) के समन्वय में चयनित 205 स्कूलों में यह आकलन किया जाएगा। प्रत्येक चयनित स्कूल से चौथी कक्षा के 12 बच्चों को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इस तरह का आकलन प्रारंभिक स्तर पर सीखने की गुणवत्ता को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और भविष्य की शैक्षिक रणनीतियों को अधिक सटीक बनाने में सहायक होता है।
पूरी तरह टैबलेट आधारित होगी फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी
फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी पूरी तरह टैबलेट आधारित होगी, जिससे आकलन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न हो सकेगी। डिजिटल माध्यम के उपयोग से डेटा संग्रहण और विश्लेषण में तेजी आएगी और मानवीय त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। इसके साथ ही सभी स्तरों पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आकलन के दौरान निर्धारित मानकों और प्रक्रियाओं का पालन हो, ताकि परिणाम विश्वसनीय और उपयोगी हों। इस अध्ययन से प्राप्त आंकड़ों का विश्लेषण समग्र शिक्षा के विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से किया जाएगा। इससे शिक्षा से जुड़े निर्णयों को ठोस आधार मिलेगा और नीति निर्माण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देंगे कि किन क्षेत्रों में बच्चों को अतिरिक्त सहयोग और मार्गदर्शन की आवश्यकता है, जिससे लक्षित शैक्षिक हस्तक्षेप की योजना बनाई जा सके। इससे संसाधनों के बेहतर उपयोग और शिक्षण पद्धतियों में सुधार की दिशा भी तय होगी।
समग्र शिक्षा के निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि सैंपल आधार पर प्रदेश के चयनित स्कूलों में फाउंडेशनल लर्निंग स्टडी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी और इससे बच्चों के सीखने की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। स्टडी के निष्कर्षों के आधार पर बच्चों की कमजोरियों की पहचान कर उनके समाधान के लिए लक्षित शैक्षिक हस्तक्षेप किए जाएंगे, ताकि प्रारंभिक स्तर पर ही उनकी शैक्षिक नींव को सुदृढ़ किया जा सके।
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