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हिमाचल देशभर में फिर अव्वल, समग्र शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में जीरो पेंडेंसी



समग्र शिक्षा के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के मामले में हिमाचल प्रदेश एक बार देश में अव्वल रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच समग्र शिक्षा के तहत मंजूर किए गए इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों के आंकड़ों में हिमाचल का प्रदर्शन शानदार रहा है। राज्य में इन पांच वर्षों के दौरान मंजूर किए गए कार्यों की ओवरऑल पेंडेंसी शून्य प्रतिशत दर्ज की गई है। यानी केंद्र से स्वीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में एक भी कार्य लंबित नहीं है। हिमाचल के इस प्रदर्शन की केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने भी सराहना की है। स्कूलों के लिए स्वीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को समय पर पूरा करने के मामले में हिमाचल प्रदेश देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है। हिमाचल के साथ राज्यों में केवल गोवा और केंद्र शासित प्रदेशों में पुडुचेरी की पेंडेंसी भी शून्य प्रतिशत है। हिमाचल की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केरल भी इस मामले में हिमाचल से काफी पीछे है। केरल में इंफ्रास्ट्रक्चर वर्क की पेंडेंसी 75.57 प्रतिशत दर्ज की गई है। वहीं दादरा एवं नगर हवेली और दमन एवं दीव में 65.06 प्रतिशत तथा जम्मू-कश्मीर में 59.21 प्रतिशत पेंडेंसी दर्ज हुई है। यह अंतर हिमाचल में स्वीकृत कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन की तस्वीर को और स्पष्ट करता है।
हिमाचल की उपलब्धि केवल ओवरऑल पेंडेंसी तक सीमित नहीं है। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के दौरान समग्र शिक्षा के तहत जिन विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों को मंजूरी दी गई, उनके प्रत्येक घटक में हिमाचल प्रदेश की पेंडेंसी शून्य प्रतिशत रही है। अतिरिक्त कक्षाओं के निर्माण से लेकर आर्ट एंड क्राफ्ट रूम, बाउंड्री वॉल, बिल्डिंग निर्माण और कंप्यूटर रूम तक सभी स्वीकृत कार्यों को समय पर पूरा किया गया है। इसी तरह जर्जर भवनों के पुनर्निर्माण/सुधार, पेयजल सुविधा, विद्युतीकरण और विभिन्न प्रकार की प्रयोगशालाओं से जुड़े कार्यों में भी हिमाचल की पेंडेंसी शून्य है। बायोलॉजी लैब, केमिस्ट्री लैब, फिजिक्स लैब और साइंस लैब के सभी स्वीकृत कार्य भी समय पर पूरे किए गए हैं। स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण के लिए स्वीकृत लाइब्रेरी रूम और मेजर रिपेयर के कार्य भी समय पर पूरे हुए हैं। नए विद्यालय खोलने, रैंप एवं हैंडरेल उपलब्ध करवाने तथा सोलर पैनल स्थापित करने जैसे कार्यों में भी हिमाचल प्रदेश ने शत-प्रतिशत कार्य निष्पादन सुनिश्चित किया है।
विद्यार्थियों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों में भी यही स्थिति देखने को मिलती है। बॉयज टॉयलेट, गर्ल्स टॉयलेट और रिपेयर से संबंधित स्वीकृत कार्यों में हिमाचल प्रदेश की पेंडेंसी शून्य प्रतिशत रही है। इसका अर्थ है कि इन सभी इंफ्रास्ट्रक्चर घटकों के तहत स्वीकृत कार्य समय पर पूरे किए गए हैं।
 


डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी हिमाचल की उल्लेखनीय उपलब्धि
इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ डिजिटल शिक्षा के क्षेत्र में भी हिमाचल ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। राज्य में 100 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम फंक्शनल हैं। वहीं केरल में करीब 50 प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम ही फंक्शनल हैं। ऐसे में स्मार्ट क्लासरूम के प्रभावी संचालन के मामले में हिमाचल की उपलब्धि और महत्वपूर्ण हो जाती है।
समग्र शिक्षा के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में शून्य पेंडेंसी और स्मार्ट क्लासरूम का 100 प्रतिशत फंक्शनल होना इस बात को दर्शाता है कि शिक्षा के लिए चलाई जा रही योजनाओं एवं कार्यों का धरातल पर समयबद्ध तरीके से क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से भी हिमाचल के इस प्रदर्शन की सराहना की गई है।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र शिक्षा के तहत स्कूलों के लिए स्वीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों में शून्य पेंडेंसी  और शत-प्रतिशत स्मार्ट क्लासरूम का फंक्शनल होना हिमाचल प्रदेश के लिए गौरव की बात है। यह उपलब्धि समग्र शिक्षा की पूरी टीम, विशेषकर सिविल कोऑर्डिनेटर रंजना चौहान और उनकी टीम सहित अन्य कोऑर्डिनेटरों के सहयोग का परिणाम है। समग्र शिक्षा का प्रयास केवल कार्यों को समय पर पूरा करना नहीं, बल्कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण और बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित करना है। स्मार्ट क्लासरूम सहित सभी स्वीकृत इंफ्रास्ट्रक्चर कार्यों का प्रभावी क्रियान्वयन इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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