BEEOs के लिए राज्य स्तरीय ECCE Orientation कार्यक्रम आयोजित
हिमाचल में PM SHRI योजना के अंतर्गत स्कूलों में प्री-प्राइमरी शिक्षा एवं प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल एवं शिक्षा (ECCE) को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य स्तरीय ECCE Orientation कार्यक्रम आयोजित किया गया। पाँच दिवसीय इस कार्यक्रम में छह जिलों के लगभग 71 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
Orientation कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर जिला कुल्लू के उप निदेशक प्रारंभिक शिक्षा एवं जिला परियोजना अधिकारी ज्ञान चंद तथा प्रधानाचार्य, डाइट कुल्लू सतीश जस्पा ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर SCERT सोलन की प्री-प्राइमरी समन्वयक रंजना राणा, समग्र शिक्षा स्टेट ECCE कोऑर्डिनेटर सुनीता चौहान, रेखा गुलेरिया, पूर्व ECCE कोऑर्डिनेटर दलीप वर्मा, डाइट कुल्लू की प्री-प्राइमरी समन्वयक कविता गुलेरिया, चमन प्रकाश, कुलदीप शर्मा, पूनम शर्मा, शीला शर्मा सहित डाइट के अन्य संकाय सदस्य उपस्थित रहे।
ECCE की अवधारणा से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक दी गई जानकारी
Orientation कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य BEEOs को ECCE की अवधारणा, इसके विभिन्न आयामों और विद्यालय स्तर पर इसके प्रभावी क्रियान्वयन की समझ प्रदान करना रहा, ताकि वे अपने-अपने विकासखंडों में प्री-प्राइमरी कार्यक्रम को बेहतर शैक्षणिक सहयोग, मार्गदर्शन और नियमित अनुश्रवण के माध्यम से सुदृढ़ कर सकें। ECCE को बच्चे के आगे के शैक्षणिक जीवन की आधारशिला माना जाता है, जिसमें केवल प्रारंभिक पढ़ने-लिखने की क्षमता विकसित करने के बजाय बच्चे के शारीरिक, संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक, भाषाई, रचनात्मक और सीखने की आदतों से जुड़े विकास पर एक साथ ध्यान दिया जाता है।
कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा–आधारभूत अवस्था (NCF-FS) के प्रावधानों को प्री-प्राइमरी शिक्षा के संदर्भ में समझाया गया। बाल विकास के विभिन्न पक्षों पर भी चर्चा की गई। इसमें बताया गया कि प्रत्येक बच्चे की सीखने की गति और रुचि अलग हो सकती है, इसलिए प्री-प्राइमरी कक्षा में बच्चों की व्यक्तिगत जरूरतों को समझते हुए गतिविधियों की योजना बनाना आवश्यक है। बच्चों में भाषा एवं संचार, सोचने-समझने की क्षमता, शारीरिक एवं मोटर विकास, सामाजिक व्यवहार, भावनात्मक अभिव्यक्ति, रचनात्मकता तथा आत्मनिर्भरता जैसे कौशलों को गतिविधियों के माध्यम से विकसित करने के तरीकों पर भी चर्चा हुई।
‘हिमवाटिका’ और ‘जादुई पिटारा’ से सीखने को बनाया जाएगा अधिक रोचक
‘हिमवाटिका’ और ‘जादुई पिटारा’ जैसे शिक्षण-संसाधनों के उपयोग पर इस दौरान विशेष जोर दिया गया। कार्यशाला में बताया गया कि छोटे बच्चों के लिए सीखने की सामग्री केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित न होकर खिलौनों, खेलों, पहेलियों, कठपुतलियों, चित्रों, फ्लैश कार्ड, कहानी और स्थानीय परिवेश से जुड़ी सामग्री के रूप में भी हो सकती है। ‘जादुई पिटारा’ इसी play-based learning दृष्टिकोण के अनुरूप विभिन्न शिक्षण-अधिगम सामग्रियों का संग्रह है, जिसका उद्देश्य बच्चों को खेल और अनुभव के माध्यम से सीखने के अवसर उपलब्ध कराना है।
‘पहली शिक्षक–माँ’ पहल से घर और स्कूल के बीच जुड़ाव पर जोर
सामुदायिक सहभागिता और ‘पहली शिक्षक–माँ’ पहल को भी ECCE की सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया गया। ‘पहली शिक्षक–माँ’ पहल के माध्यम से माताओं को बच्चों के साथ घर पर विकासात्मक, भाषाई, रचनात्मक और अन्य गतिविधियां करने के लिए सक्षम बनाने तथा स्वास्थ्य, सुरक्षा एवं पोषण से जुड़े पहलुओं के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। इससे घर और स्कूल के बीच बेहतर शैक्षणिक जुड़ाव विकसित करने में मदद मिलती है।
प्रतिभागियों को आकलन, मेंटरिंग एवं मॉनिटरिंग के महत्व से भी अवगत कराया गया। मेंटरिंग एवं मॉनिटरिंग के माध्यम से शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग देना, कक्षा में अपनाई जा रही गतिविधियों की समीक्षा करना और सामने आ रही चुनौतियों के समाधान के लिए समय पर मार्गदर्शन उपलब्ध करवाने की जानकारी दी गई। प्रदेश में प्री-प्राइमरी कार्यक्रम के लिए शैक्षणिक सहयोग, क्षमता निर्माण, मेंटरिंग, मॉनिटरिंग और फॉलो-अप की व्यवस्था पर भी विशेष बल दिया गया।
ECCE कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए आगामी कार्ययोजना पर चर्चा
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों ने अपने-अपने विकासखंडों में ECCE कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा की। इसमें स्कूल स्तर पर प्री-प्राइमरी गतिविधियों के बेहतर क्रियान्वयन, शिक्षकों को निरंतर शैक्षणिक सहयोग, अभिभावकों एवं समुदाय की भागीदारी बढ़ाने तथा बच्चों के समग्र विकास के लिए अनुकूल सीखने का वातावरण तैयार करने जैसे पहलुओं को शामिल किया गया।
कार्यशाला के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य डाइट कुल्लू सतीश जस्पा और सेक्शन ऑफिसर सुनील शर्मा ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। उन्होंने कार्यशाला के दौरान प्राप्त सीख को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में प्रभावी रूप से लागू करने तथा प्री-प्राइमरी शिक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आह्वान किया।
Pratham Education Foundation से कुलदीप, केवल कृष्ण, जागृति एवं पुरुषोत्तम ने Resource Persons के रूप में प्रतिभागियों को विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण एवं शैक्षणिक सहयोग प्रदान किया।
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