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STEM प्रोजेक्ट: समग्र शिक्षा ने 1.46 लाख छात्रों का कराया प्रोफिशियेंसी टेस्ट


 

हिमाचल प्रदेश के स्कूली छात्रों में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में नवाचार और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए समग्र शिक्षा  ने STEM पायलट प्रोजेक्ट शुरु किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत छात्रों को कोडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और AR तकनीक में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके लिए गुरुवार को छात्रों प्रोफिशियेंसी टेस्ट आयोजित किया गया।
इस प्रोफिशियेंसी टेस्ट में 12 जिलों के 700 स्कूलों के कुल 1,46,332 छात्रों ने हिस्सा लिया। इनमें कांगड़ा जिले से सर्वाधिक 149 स्कूल, मंडी से 109, ऊना से 71, हमीरपुर से 67, सोलन से 59, शिमला से 53, सिरमौर से 51, चंबा से 50, बिलासपुर से 47, कुल्लू से 30, लाहौल-स्पीति से 10 और किन्नौर से 4 स्कूलों में यह टेस्ट कराया गया।
प्रोफिशियेंसी टेस्ट में सफल छात्रों को विशेष बूटकैंप में भाग लेने का अवसर मिलेगा। इस बूटकैंप में उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षकों से उन्नत प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इसके बाद उनके तैयार प्रोजेक्टों की जिला, प्रदेश, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
STEM का उद्देश्य छात्रों की जिज्ञासा, नवाचार और तकनीकी क्षमता को विकसित करना है। प्रोजेक्ट के तहत छात्रों को प्रोजेक्ट-आधारित शिक्षा और आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं पर काम कर समाधान खोज सकें। यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप 21वीं सदी के कौशलों जैसे रचनात्मकता, आलोचनात्मक सोच, सहयोग और संचार पर विशेष जोर देती है।



शिक्षक प्रशिक्षण के बाद अब छात्रों को ट्रैनिंग की तैयारी

इस प्रोजेक्ट की सफलता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षकों को पहले ही कोडिंग, AI और 3D XR जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षित किया गया, ताकि वे छात्रों को मार्गदर्शन और तकनीकी सहायता प्रदान कर सकें। यह पहल छात्रों को STEM विषयों में रुचि लेने, तार्किक सोच और सहयोग जैसी क्षमताओं को विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। STEM प्रोजेक्ट के माध्यम से छात्र न केवल तकनीकी रूप से सशक्त होंगे, बल्कि रचनात्मक और आलोचनात्मक सोच के माध्यम से समाज की समस्याओं के समाधान के लिए भी तैयार होंगे।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा है कि STEM  प्रोजेक्ट के तहत छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कोडिंग, रोबोटिक और AR तकनीक जैसी आधुनिक तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसका मकसद छात्रों में  रचनात्मकता, तार्किक सोच और तकनीकी  जैसे महत्वपूर्ण कौशलों का विकास करना है, जो उनके भविष्य के लिए अनिवार्य हैं।





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