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राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में दिखी गुणात्मक शिक्षा की झलक



शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान पर आयोजित राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दी जा रही गुणात्मक एवं उत्कृष्ट शिक्षा की झलक देखने को मिली। समग्र शिक्षा की ओर से शिक्षा विभाग के लिए स्कूली शिक्षा पर आधारित बनाई झांकी ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की प्रभावशाली तस्वीर प्रस्तुत की। “गुणात्मक एवं उत्कृष्ट शिक्षा” विषय पर आधारित इस झांकी के माध्यम से यह दर्शाया गया कि किस प्रकार हिमाचल सरकार स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है और सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को समान और बेहतर अवसर प्रदान किए जा रहे हैं।

 

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की बदली तस्वीर
राज्य स्तरीय समारोह में विभिन्न विभागों की झांकियां प्रदर्शित की गईं, जिनमें समग्र शिक्षा की ओर से शिक्षा विभाग के लिए बनाई स्कूली शिक्षा को दर्शाती झांकी भी शामिल थी। “गुणात्मक एवं उत्कृष्ट शिक्षा – हिमाचल की पहचान” विषय पर आधारित इस झांकी ने यह स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दे रही है, जहां शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं है बल्कि कौशल, नवाचार और व्यक्तित्व विकास को भी समान महत्व दिया जा रहा है।

 

सीबीएसई पाठ्यक्रम की ओर बढ़ते सरकारी स्कूल
झांकी के माध्यम से यह भी बताया गया कि हिमाचल सरकार ने सरकारी स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम लागू करने का निर्णय लिया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना है, ताकि वे देशभर के छात्रों के साथ आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें। यह निर्णय सरकार की दूरदर्शी और भविष्य केंद्रित शिक्षा नीति को दर्शाता है।



सरकारी स्कूलों के छात्रों के लिए विदेशी शैक्षणिक भ्रमण
समग्र शिक्षा की ओर से बनाई झांकी में प्रदेश सरकार की उस अभिनव पहल को भी दर्शाया गया, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के मेधावी विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों के साथ साथ विदेशी शैक्षणिक भ्रमण पर भी भेजा जा रहा है । बीते वर्ष 50 विद्यार्थियों को सिंगापुर और कंबोडिया की शैक्षणिक यात्रा पर भेजा गया, जिससे वे वहां की उन्नत शिक्षा प्रणालियों को समझ सके। ऐसा करने वाला हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बना, जिसकी केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा भी सराहना की गई।
इसके अतिरिक्त प्रदेश के विद्यार्थियों को देश के विभिन्न राज्यों में शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पर भी भेजा जा रहा है। हाल ही में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को हिमाचल विधानसभा का भ्रमण करवाया गया, जहां उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था की जानकारी मिली। साथ ही चंडीगढ़, अमृतसर और वाघा बॉर्डर जैसे ऐतिहासिक स्थलों का भी भ्रमण करवाया गया।



STEM से नवाचार को दिया जा रहा प्रोत्साहन
समग्र शिक्षा के अंतर्गत प्रदेश के स्कूलों में स्टेम परियोजना शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है। इस पहल के तहत प्रोजेक्ट आधारित शिक्षा पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी अपने आसपास की स्थानीय समस्याओं की पहचान कर उनके समाधान के लिए नवाचारी परियोजनाएं तैयार कर सकें। इससे विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित विषयों में छात्रों की रुचि और क्षमता को बढ़ावा मिल रहा है। इसको भी झांकी में बखूबी दिखाया गया।



क्लस्टर प्रणाली से शिक्षण व्यवस्था में सुधार
हिमाचल सरकार द्वारा स्कूलों में विकसित की गई क्लस्टर प्रणाली के बारे में भी जानकारी दी गई , जिसके तहत प्री प्राइमरी से लेकर वरिष्ठ माध्यमिक स्तर तक के स्कूलों को एक कलस्टर में जोड़ा गया है। इसके माध्यम से स्कूल आपस में संसाधनों को साझा कर रहे हैं, जिससे शिक्षण गुणवत्ता और दक्षता में सुधार आया है। प्रदेश में प्री प्राइमरी कक्षाएं शुरू कर बच्चों के प्रारंभिक विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।



शिक्षकों के लिए आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
झांकी में यह भी दर्शाया गया कि प्रदेश सरकार शिक्षकों के प्रशिक्षण को लेकर निरंतर प्रयास कर रही है। यूनेस्को, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और सिंगापुर की प्रिंसिपल अकादमी जैसे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग से शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से भी प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है, ताकि इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों की शिक्षा गुणवत्ता पर पड़े। झांकी में दिखाया गया कि हिमाचल के स्कूलों में बच्चों के कौशल विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे वे रोजगारोन्मुख शिक्षा प्राप्त कर सकें। शिक्षा के क्षेत्र में किए गए इन व्यापक सुधारों का सकारात्मक प्रभाव बच्चों के सीखने के स्तर में स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। परख सर्वे 2024 में हिमाचल प्रदेश देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि असर और पीजीआई रिपोर्ट में भी प्रदेश बच्चों के सीखने के स्तर में उल्लेखनीय सुधार के साथ अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।
राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में समग्र शिक्षा की ओर से बनाई यह झांकी शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों की प्रेरक कहानी कहती नजर आई। दर्शकों ने इस झांकी की खूब सराहना की और पूरे समारोह के दौरान यह झांकी तालियों और प्रशंसा का केंद्र बनी रही।


प्रदेश में सकारात्मक- गुणात्मक शैक्षणिक बदलावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया: राजेश शर्मा
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में समग्र शिक्षा की ओर से बनाई गई झांकी के माध्यम से हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में हो रहे सकारात्मक और गुणात्मक शैक्षणिक बदलावों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया । यह झांकी इस बात का प्रतीक है कि प्रदेश सरकार बच्चों को समान अवसर, आधुनिक शिक्षा, कौशल विकास और वैश्विक दृष्टिकोण प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का लक्ष्य शिक्षा को केवल पाठ्य पुस्तकों तक सीमित न रखकर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित करना है।

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