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भगवान इंद्रुनाग देवता के दरबार क्यों पहुंचे अनुराग ठाकुर ?


 
भारत और अफगानिस्तान के बीच धर्मशाला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित होने वाले एकदिवसीय क्रिकेट मैच से पूर्व पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने एचपीसीए पदाधिकारियों के साथ खनियारा स्थित भगवान श्री इंद्रुनाग देवता के मंदिर में माथा टेका। उन्होंने मैच के सफल आयोजन तथा मौसम साफ रहने की कामना करते हुए विशेष पूजा-अर्चना की। 
इस अवसर पर अनुराग ठाकुर ने कहा कि धर्मशाला में होने वाले क्रिकेट मैचों पर भगवान श्री इंद्रुनाग देवता का विशेष आशीर्वाद रहा है और उन्हें विश्वास है कि इस बार भी आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न होगा। उन्होंने कहा कि धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम ने हिमाचल प्रदेश को वैश्विक पहचान दिलाई है, जिससे प्रदेश में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। इस मौके पर एचपीसीए पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे। 
 
 

क्रिकेट मैच से पहले भगवान श्री इंद्रुनाग देवता से आशीर्वाद लेने की परंपरा कायम 
धर्मशाला के खनियारा स्थित भगवान श्री इंद्रुनाग देवता का मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। भगवान इंद्रदेव के स्वरूप माने जाने वाले श्री इंद्रुनाग को वर्षा और मौसम के देवता के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से मौसम अनुकूल बना रहता है और क्षेत्र में सुख-समृद्धि बनी रहती है। 
इसी विश्वास के चलते धर्मशाला में होने वाले अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों से पहले हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) द्वारा यहां विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। वर्ष 2003 से धर्मशाला स्टेडियम में अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का आयोजन शुरू होने के बाद यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार मैचों के दौरान मौसम अनुकूल बनाए रखने और आयोजन को सफल बनाने के लिए भगवान श्री इंद्रुनाग का आशीर्वाद लिया जाता है। यही कारण है कि क्रिकेट और आस्था का यह अनूठा संगम धर्मशाला की पहचान का विशेष हिस्सा बन चुका है। 
 
 
सदियों से श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है इंद्रुनाग मंदिर 
भगवान श्री इंद्रुनाग देवता का इतिहास सदियों पुराना और लोक आस्थाओं से समृद्ध माना जाता है। मान्यता के अनुसार खनियारा क्षेत्र में एक वान वृक्ष के नीचे भगवान के पवित्र पदचिह्न प्राप्त हुए थे। इसके बाद चंबा के एक राजा, जो संतान प्राप्ति की कामना कर रहे थे, को भगवान श्री इंद्रुनाग ने स्वप्न में दर्शन दिए और आशीर्वाद प्रदान किया। 
कहा जाता है कि स्वप्न में बताए गए स्थान पर पहुंचकर राजा ने भगवान की आराधना की और कुछ समय बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर राजा ने पुनः यहां आकर पूजा-अर्चना की तथा मंदिर का निर्माण करवाया। साथ ही मंदिर की सेवा और व्यवस्था के लिए भूमि भी समर्पित की। 
तब से यह स्थान श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ यहां आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि आज भी प्रदेश ही नहीं, देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु भगवान श्री इंद्रुनाग देवता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए यहां पहुंचते हैं। 
 
 

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