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अनुराग ठाकुर ने सरकारी लॉटरी शुरू करने पर जताया कड़ा एतराज, सीएम को लिखा पत्र




पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल ने 1999 में लगाई थी लॉटरी पर पाबंदी
हिमाचल में सरकारी लॉटरी दोबारा शुरू करने की तैयारी का विरोध शुरू हो गया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर ने सरकारी लॉटरी शुरू करने पर कड़ा एतराज जताया है। अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को पत्र लिखकर राज्य में सरकारी लॉटरी दोबारा शुरू करने के लिए जारी किए गए टेंडर को तुरंत वापस लेने की मांग की है।  
अनुराग ठाकुर ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश में बीते दो दशकों से अधिक समय से लॉटरी पर प्रतिबंध को लेकर सभी सरकारों के बीच सहमति रही है। उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 1999 में तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल के नेतृत्व वाली सरकार ने कर्मचारियों, पेंशनभोगियों, मजदूरों और युवाओं पर लॉटरी के गंभीर दुष्प्रभावों को देखते हुए इस पर प्रतिबंध लगाया था। जब लॉटरी दोबारा शुरू हुई तो वर्ष 2007 में स्वर्गीय वीरभद्र सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने फिर से इस पर प्रतिबंध लगा दिया। इसके बाद भी वीरभद्र सिंह, प्रेम कुमार धूमल और जयराम ठाकुर के नेतृत्व वाली सरकारों ने वित्तीय दबाव के बावजूद इस प्रतिबंध को जारी रखा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक फैसला नहीं, बल्कि प्रदेश के लोगों के अनुभवों के आधार पर बनी एक व्यापक सहमति थी।


हिमाचल पहले ही भुगत चुका है लॉटरी के दुष्परिणाम
अनुराग ठाकुर ने कहा कि हिमाचल पहले भी देख चुका है कि कई परिवारों की तनख्वाह, बचत और पेंशन का पैसा लॉटरी में चला गया, जिससे परिवार आर्थिक संकट में पहुंच गए। उन्होंने विशेष रूप से प्रस्तावित ऑनलाइन लॉटरी प्रणाली पर चिंता जताते हुए कहा कि इसमें प्रतिदिन 12 ड्रॉ और साल में 3 बंपर ड्रॉ आयोजित किए जा सकते हैं। सरकार के फैसले से जुए को सीधे लोगों के स्मार्टफोन और घरों तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने चेताया कि इसका सबसे अधिक असर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर पड़ सकता है।

 
वित्तीय संकट से निपटने का ठोस समाधान नहीं है लॉटरी
प्रदेश की आर्थिक स्थिति का जिक्र करते हुए अनुराग ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2026 में राज्य का कर्ज बढ़कर 1,10,010 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है और कर्ज-से-जीएसडीपी अनुपात 42 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। ऐसी स्थिति में लॉटरी राज्य की आर्थिक समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित लॉटरी से सालाना लगभग 100 करोड़ रुपये की आय होने का अनुमान है। वहीं, केरल के अनुभव से यह स्पष्ट है कि लॉटरी की बड़ी कुल बिक्री के बावजूद इनामी राशि, कमीशन, विज्ञापन और प्रशासनिक खर्चों के बाद सरकार को मिलने वाला वास्तविक राजस्व काफी कम हो सकता है।  अनुराग ठाकुर ने इसके बजाय राज्य में जीएसटी अनुपालन को मजबूत करने और डिजिटल इंटीग्रेशन बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र आकलनों के अनुसार इन सुधारों से बिना लॉटरी जैसे सामाजिक दुष्प्रभावों के राज्य को सालाना अतिरिक्त 250 से 350 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि लॉटरी से संबंधित टेंडर को तत्काल रद्द कर प्रदेश में बीते दो दशकों से चली आ रही लॉटरी प्रतिबंध की सहमति को कायम रखा जाए।

 

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