नंदपुर किले में ‘चरैवेति 2026’ के साथ विश्व पर्यटन सप्ताह का आगाज
हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUHP) ने ऐतिहासिक नंदपुर किला, गुलेर में आयोजित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक संगोष्ठी ‘चरैवेति 2026’—गुलेर कॉन्फ्रेंस के साथ विश्व पर्यटन सप्ताह समारोह का शुभारंभ किया। पर्यटन, यात्रा एवं आतिथ्य प्रबंधन स्कूल (SOTTHM) और दृश्य कला विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में नंदपुर किले के संरक्षण, पर्यटन विकास और स्थानीय विरासत को पुनर्जीवित करने पर चर्चा हुई।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. सत प्रकाश बंसल ने कार्यक्रम के दौरान घोषणा की कि हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय नंदपुर किले को गोद लेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय किले के संरक्षण, जीर्णोद्धार और पर्यटन विकास के लिए निरंतर कार्य करेगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल कक्षाओं तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उन्हें स्थानीय विरासत के संरक्षण में भी योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा, “किला सिर्फ पत्थरों का ढेर नहीं है, यह एक कहानी है। अगर हम इसकी कहानी को पुनर्जीवित कर सकते हैं, तो पर्यटन स्वतः ही आएगा।”
शोध के माध्यम से गुलेर को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने पर जोर
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (IIAS), शिमला की निदेशक प्रो. हिमांशु चतुर्वेदी ने गुलेर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह निरंतर शैक्षणिक प्रयासों से शिमला स्थित भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान एक महत्वपूर्ण विरासत एवं शैक्षणिक गंतव्य बना है, उसी तरह शोध-आधारित प्रयासों से गुलेर को भी विश्व पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि विरासत पर्यटन का उद्देश्य नए आकर्षण तैयार करना ही नहीं, बल्कि पहले से मौजूद विरासत के महत्व को पहचानना और उसे लोगों तक पहुंचाना भी है।
गुलेर चित्रकला और नंदपुर किले की विरासत प्रदर्शनी बनी आकर्षण
सम्मेलन में दृश्य कला विभाग के विद्यार्थियों ने गुलेर चित्रकला शैली और नंदपुर किले से संबंधित चित्रों की विशेष प्रदर्शनी लगाई। प्रदर्शनी में गुलेर राजवंश की सांस्कृतिक विरासत, शाही परंपराओं और विश्व प्रसिद्ध गुलेर लघु चित्रकला शैली को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। प्रसिद्ध कला पारखी एवं विरासत प्रेमी नरेंद्र रावल ने विद्यार्थियों की चित्रकला प्रदर्शनी की सराहना की। उन्होंने SOTTHM के विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए हेरिटेज वॉक मॉडल और विरासत की व्याख्या संबंधी प्रयासों की भी प्रशंसा की।
पर्यटन को भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने पर जोर
विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता अकादमिक प्रो. (डॉ.) प्रदीप कुमार ने वेदों के श्लोकों और छंदों के माध्यम से पर्यटन की अवधारणा को समझाया। उन्होंने कहा कि ‘अतिथि देवो भवः’ और सचेत यात्रा की अवधारणा भारतीय ज्ञान परंपरा में गहराई से निहित है। उन्होंने नंदपुर किले को पर्यटन से जोड़ने के प्रयासों की सराहना करते हुए टिकाऊ और अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े पर्यटन की आवश्यकता पर जोर दिया।
गुलेर-नंदपुर पर्यटन सर्किट पर शोध का आह्वान
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विभाग के उप निदेशक विनय धीमान ने नंदपुर किले जैसे उपेक्षित विरासत स्थल को शैक्षणिक जुड़ाव के लिए चुनने की विश्वविद्यालय की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं और शोधार्थियों को गुलेर-नंदपुर पर्यटन सर्किट की संभावनाओं पर शोध कर सरकार के समक्ष ठोस एवं कार्यान्वयन योग्य प्रस्ताव रखना चाहिए।
राजपरिवार के सदस्य ने बताया नंदपुर किले का इतिहास
गुलेर राजपरिवार से जुड़े राघव गुलेरिया ने नंदपुर किले के इतिहास और गुलेर रियासत की विरासत से प्रतिभागियों को परिचित करवाया। उन्होंने गुलेर की कला परंपरा, सांस्कृतिक योगदान और नंदपुर किले के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम में 100 से अधिक विद्यार्थियों, शोधार्थियों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने किले की सफाई, प्रदर्शनी की क्यूरेशन, हेरिटेज वॉक और अन्य गतिविधियों में योगदान दिया। खुले सत्र में नंदपुर किले को विरासत, पर्यटन, स्थिरता और इको-टूरिज्म से जोड़कर विकसित करने के लिए रोडमैप पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम के अंत में SOTTHM के अधिष्ठाता प्रो. आशीष नाग ने सभी अतिथियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आयोजन से जुड़े सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
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